खैबर पख्तूनख्वा के खैबर जिले की तिराह घाटी में डर का साया मंडरा रहा है। टीटीपी के खिलाफ प्रस्तावित सैन्य अभियान की अफवाहों ने बड़े पैमाने पर पलायन शुरू करा दिया। स्थानीय आबादी केंद्र और पीटीआई सरकार के बीच उलझे विवाद की भेंट चढ़ रही है।
द एक्सप्रेस ट्रिब्यून में विश्लेषक इहसानुल्लाह टीपू महसूद ने बताया कि 12 बड़े ऑपरेशन के बावजूद आतंकवाद जड़ें जमा चुका। हिंसा थमने के बजाय उग्र हो गई।
राजनीतिक आरोपों के बीच नागरिक तबाही झेल रहे। घर उजड़े, जीविका नष्ट, लेकिन पुनर्निर्माण के वादे झूठे साबित हुए। कड़ाके की सर्दी में विस्थापितों की व्यथा बढ़ रही।
सोशल मीडिया पर पश्तूनों को निशाना बनाया जा रहा, जो 2018 के विलय को कमजोर कर रहा। सरकार मीडिया के जरिए अपनी नाकामियां छिपा रही।
निवासी तिराह को बदनाम करने का विरोध कर रहे। जिरगा के 10 जनवरी वाले फैसले पर सवाल, क्योंकि प्रांतीय सरकार ही अधिकृत है। मुख्यमंत्री के सलाहकार ने दबाव का दावा किया। यह संकट पाकिस्तान की आतंकी समस्या की जड़ें उजागर करता है।