पाकिस्तान के बलूचिस्तान में बीएलए के ‘ऑपरेशन हीरोफ 2.0’ ने 31 जनवरी को 14 शहरों में धमाल मचा दिया। 48 ठिकानों पर हमले हुए, जहां पाकिस्तान ने लड़ाकों के सफाए का दावा किया तो बीएलए ने सेना पर प्रहार की बात कही।
रिपोर्ट बताती है कि यह विद्रोह लंबे उत्पीड़न का नतीजा है। सोना-तांबा-गैस से मालामाल प्रांत गरीबी में डूबा। विदेशी निवेश सुरक्षा के नाम पर सैन्य घेराबंदी में हो रहा, स्थानीय उपेक्षित। जबरन गुमशुदगी हजारों को निगल गई, कोई दोषी नहीं।
एचआरडब्ल्यू और एमनेस्टी ने अपहरण, यातना, लाशें फेंकने की कड़ी बयान की। यूएन ने 2025 में जांच मांगी। हयात बलूच हत्या, ग्वादर आंदोलन दमन, चुनावी फ्रॉड, माहरंग गिरफ्तारी ने हालात बिगाड़े।
कपलान कहते हैं, पीढ़ियां कट्टर बनीं। राज्य असहमति कुचल रहा, सशस्त्र संघर्ष बढ़ा। सुधार न हुआ तो संकट गहराएगा।