दिल्ली विकास प्राधिकरण के यमुना जैव विविधता पार्क ने सोमवार को विश्व आर्द्रभूमि दिवस धूमधाम से मनाया। आर्द्रभूमि के किनारे एम्फीथिएटर में आयोजित इस समारोह की थीम ‘आर्द्रभूमि और पारंपरिक ज्ञान: सांस्कृतिक विरासत का उत्सव’ रही, जो आर्द्रभूमि संरक्षण को हमारी पुरानी परंपराओं से जोड़ती है।
350 से अधिक प्रतिभागियों ने शिरकत की, जिसमें दिल्ली यूनिवर्सिटी के केशव महाविद्यालय, स्कूल ऑफ बिजनेस इकोनॉमिक्स, आईपी कॉलेज, एमवी कॉलेज ऑफ एजुकेशन जैसे संस्थानों के युवा, शोधकर्ता, यूपीएससी वाले, शिक्षाविद्, पत्रकार, पर्यावरण प्रेमी, आसपास के लोग और डीडीए कर्मी शामिल थे।
उपाध्यक्ष डॉ. एन सरवाना कुमार ने संबोधित करते हुए शहरी शासन और भूमि उपयोग से बाढ़ सुरक्षा पर बल दिया। डीडीए पार्क दिल्ली के 15% क्षेत्र पर हैं, जो सार्वजनिक हैं। सीईएमडीई के साथ सात जैव विविधता पार्क जीवन गुणवत्ता बढ़ा रहे। यमुना फ्लडप्लेन से अतिक्रमण हटाकर बांसेरा व असिता पार्क बनाना सराहनीय है, छात्रों को विजिट करने को कहा।
प्रो. सीआर बाबू ने बताया नदियां आर्द्रभूमि से निकलती हैं, 87% विश्व आर्द्रभूमियां लुप्त। डॉ. शशांक शेखर ने बाढ़ मैदान पार्कों की पोषक तत्व चक्र, प्रदूषण रोकथाम में भूमिका बताई। प्रो. यामिनी गुप्त ने 26.4 ट्रिलियन डॉलर मूल्य बताया।
फोटोग्राफी प्रतियोगिता के अवार्ड राजधानी कॉलेज व स्वाध्याय सेवा फाउंडेशन के सहयोग से बांटे गए। डॉ. एम शाह हुसैन का धन्यवाद भाषण। नेचर वॉक में प्रवासी पक्षी उत्तरी पिंटेल, ग्रेट कॉर्मोरेंट आदि दिखे।