सरकार का बजट 2026-27 अब ‘तुरंत राहत’ से इतर भविष्योन्मुखी दृष्टिकोण अपना रहा है। क्रिसिल की रिपोर्ट में पूंजीगत खर्च बढ़ाने और व्यय दक्षता पर बल दिया गया है, जो अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा।
महामारी के बाद रिकवरी पर केंद्रित बजट अब सुधारों और सबका विकास पर आ गया है। जैसे-जैसे अर्थव्यवस्था स्थिर हुई, अल्पकालिक उपायों की जगह लंबे समय के निवेश ने ले ली। उद्योग व सेवा क्षेत्रों को प्रोत्साहन से अगला विकास चक्र तैयार हो रहा।
फिस्कल कंसॉलिडेशन से सरकारी खजाने को राहत मिली। जीडीपी ग्रोथ 7.4 प्रतिशत का पूर्वानुमान टैक्स राहत और खपत बढ़ाने वाली पॉलिसी से है। गरीबों के लिए स्किलिंग व एसेट बिल्डिंग पर जोर, सब्सिडी घटाने के बावजूद।
केंद्र का कैपेक्स 3.1 प्रतिशत जीडीपी, राज्यों सहित 4.4 प्रतिशत। राजस्व से कैपेक्स में शिफ्ट हुआ, बावजूद ब्याज बोझ के। 12.2 लाख करोड़ का रिकॉर्ड कैपेक्स, 9 प्रतिशत की छलांग।
भविष्य में फिस्कल डेफिसिट 4.3 प्रतिशत और 10 प्रतिशत नाममात्र ग्रोथ से भारत वैश्विक पटल पर चमकेगा।