पंजाब राजनीति में हलचल मचाने वाला मामला, जहां शिरोमणि अकाली दल नेता बिक्रम सिंह मजीठिया को सुप्रीम कोर्ट ने आय से अधिक संपत्ति केस में जमानत दे दी। सोमवार का यह निर्णय पूर्व मंत्री के लिए राहत की सांस लेकर आया।
अदालत ने उल्लेख किया कि 2022 के एनडीपीएस केस में जमानत पहले ही मिल चुकी, जिसकी पंजाब सरकार की 2025 की चुनौती असफल रही। 2006-17 का यह विवाद 2025 में एफआईआर दर्ज होने से कोर्ट ने देरी पर सवाल उठाए और जमानत योजी।
गिरफ्तारी 25 जून को हुई, जब विजिलेंस ने 25 ठिकानों पर धावा बोला, अमृतसर घर सहित। जब्त सामान में गैजेट्स, प्रॉपर्टी पेपर व बैंक रिकॉर्ड। पुलिस कस्टडी सात से बढ़कर ग्यारह दिन, उसके बाद नाभा जेल में हिरासत 6 जुलाई से।
चार्जशीट 22 अगस्त को आई, 40 हजार पेजों वाली, 200+ गवाहों सहित। 700 करोड़ की ब्लैक मनी का आरोप, पांच राज्यों में 15 साइट्स चेक। अकाली-भाजपा नेताओं के स्टेटमेंट भी।
2013 के ड्रग स्कैंडल (6000 करोड़) से लिंक, भोला की गवाही पर ड्रग चार्ज कैंसल। वर्तमान केस करप्शन पर। सुप्रीम कोर्ट का कदम जांच प्रक्रिया की कमियों को उजागर करता है, पंजाब में राजनीतिक जांचों पर बहस छेड़ दी।