1 फरवरी को याद आता है तो आंखें नम हो जाती हैं। 2003 में कोलंबिया स्पेस शटल हादसे में भारत की शान कल्पना चावला हमसे हमेशा के लिए जुदा हो गईं। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी के इस काले दिन ने दुनिया को हिला दिया था।
करनाल, हरियाणा में 17 मार्च 1962 की संतान कल्पना को विज्ञान से गहरा लगाव था। चंडीगढ़ के पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज से डिग्री लेने के बाद अमेरिका में उच्च शिक्षा ग्रहण की। नासा ने 1994 में इन्हें अपनाया।
एसटीएस-87 मिशन में 1997 में अंतरिक्ष पहुंचीं, भारतीय महिला के रूप में इतिहास रच दिया। दूसरा सफर एसटीएस-107 16 जनवरी 2003 को उड़ा।
वापसी के वक्त लैंडिंग से 16 मिनट पहले पंख में दरार से प्लाज्मा घुसा, यान टुकड़ों में बिखर गया। सातों यात्रियों की मौत हो गई।
उनकी स्मृति में अनगिनत सम्मान। राष्ट्रपति बुश ने स्वर्ण पदक दिया। कल्पना का संघर्ष युवाओं को प्रेरित करता रहेगा।