भारत के नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में गुजरात ने 42.583 गीगावाट क्षमता के साथ 16.50 प्रतिशत हिस्सेदारी हासिल कर नेतृत्व संभाला है। पवन में शीर्ष 14,820.94 मेगावाट तथा सोलर रूफटॉप में प्रथम स्थान ने राज्य को अलग पहचान दी है। सौर क्षमता 25,529.40 मेगावाट है, जिसमें ग्राउंड माउंटेड, हाइब्रिड और ऑफग्रिड सिस्टम प्रमुख हैं।
11 लाख रूफटॉप सिस्टम 6,412.80 मेगावाट पैदा कर रहे हैं, जिसमें कृषि पंपों से 89.54 मेगावाट। खावडा का मेगा पार्क 37.35 गीगावाट का लक्ष्य लिए 11.33 गीगावाट तक पहुंचा। पवन क्षेत्र में कच्छ, जामनगर जैसे जिले मजबूत हैं, हाइब्रिड नीतियों से अतिरिक्त क्षमता बढ़ी।
1993 से शुरू यात्रा में सौर, हाइब्रिड, वेस्ट टू एनर्जी नीतियां बनीं। 2023 नीति ने बैटरी स्टोरेज, रीपावरिंग को बढ़ावा दिया। 5,203 परियोजनाओं से 68.37 गीगावाट जुड़ेंगे। 2030 का 105 गीगावाट लक्ष्य राष्ट्रीय योगदान को मजबूत करेगा।
नेट मीटरिंग, डिजिटल पोर्टल और नीतिगत समर्थन से रोजगार वृद्धि हुई। गुजरात न केवल ऊर्जा आत्मनिर्भर बना रहा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण का मॉडल भी प्रस्तुत कर रहा है।