40-50 के दशक की बॉलीवुड महारानी थीं सुरैया। लाहौर से मुंबई पहुंचीं तो उम्र महज एक साल। मां के रिकॉर्ड प्लेयर ने संगीत का जादू जगाया, बिना गुरुकुल के उन्होंने गायकी सीखी। रेडियो से करियर की शुरुआत, 12 साल में ‘ताजमहल’ से स्क्रीन पर धमाल।
नौशाद का साथ मिला ‘शारदा’ में, जहां प्लेबैक ने पहचान दी। 70 फिल्मों का सफर, 330 गानों का खजाना—’बड़ी बहन’, ‘प्यार की जीत’, ‘शायर’, ‘शमां’ जैसी सुपरहिट्स। देव आनंद के साथ जोड़ी ने जादू बिखेरा, दिलों में अफवाहें पैदा कीं।
सहगल साहब की सिफारिशों से बड़े रोल मिले। ‘जाने क्या तूने कही’, ‘दिल-ए-नादान तुझे हुआ क्या है’ जैसे नगमें आज भी सुर्खियां बटोरते हैं। 1963 में ‘रुस्तम सोहराब’ के बाद विदा, अकेलेपन में जीवन कटा। 2004 में दुनिया को अलविदा कहा। उनकी विरासत सदा बरकरार रहेगी।