हिंदू कैलेंडर में 1 फरवरी विशेष है, जब माघ पूर्णिमा रविवार को रवि पुष्य एवं सर्वार्थ सिद्धि योग बनाएगी। शुभ कार्यों के लिए सर्वोत्तम, किंतु भद्रा-राहुकाल से परहेज जरूरी।
यह माघ मास की अंतिम पूर्णिमा है, कल्पवास समापन का प्रतीक। मान्यता है देवगण त्रिवेणी संगम में आकर स्नान करते हैं। पवित्र नदियों का स्नान पापहर, मोक्षदायी। दान-पुण्य से घर-परिवार में सुख-समृद्धि।
समय सारणी: तिथि 2 फरवरी 3:38 तक। पुष्य नक्षत्र 11:58 रात तक। चंद्र कर्क में। उदय 7:09, अस्त 6:00।
उत्तम काल: रवि पुष्य-सर्वार्थ सुबह से रात्रि तक। ब्रह्म 5:24-6:17, अभिजित 12:13-12:57, विजय 2:23-3:07, अमृत 5:59-7:29। सभी कार्य सफल।
निषिद्ध समय: राहु 4:39-6:00, भद्रा 7:09-4:42, यमगंड 12:35-1:56। इनसे दूर रहें।
पूर्णिमा व्रत, विष्णु लक्ष्मी चंद्र पूजा, कथा से मनोकामनाएं पूर्ण। ग्रंथों में सहस्र अश्वमेध समान पुण्य। इस रविवार को यादगार बनाएं।