अमेरिका और ईरान के बीच तनाव चरम पर पहुंचा तो राष्ट्रपति ट्रंप ने हिंद महासागर में युद्धपोत उतारने के बाद बातचीत का रास्ता चुना। यूएसएस अब्राहम लिंकन की तैनाती के ठीक बाद आया यह बयान सबको चौंका गया।
ट्रंप ने पत्रकारों से कहा कि वे ईरान से चर्चा करने की सोच रहे हैं। ‘हमारे शक्तिशाली जहाज जा रहे हैं, लेकिन उनका इस्तेमाल न हो तो बेहतर।’ विवरणों पर खामोशी बरती गई। पेंटागन ने हर संभावना के लिए सेना को अलर्ट किया।
तुर्की ने ईरान को तेल देकर अमेरिका से सौदा करने को कहा, ताकि युद्ध की नौबत न आए। मध्यस्थ बनने की इच्छा भी जताई। अमेरिकी मीडिया के अनुसार, कैरियर ग्रुप हमले या बचाव दोनों के लिए तैयार है।
क्षेत्र में पैट्रियट और थाड सिस्टम भेजे गए हैं, जो ईरानी जवाबी हमलों से बचाव करेंगे। ओमान के जरिए स्टील विटकॉफ और अब्बास अराघची के बीच मैसेज हुए, जिसमें शांति बैठक की बातचीत चली।
ट्रंप की यह रणनीति तनाव कम करने या दबाव बनाने की हो सकती है। बाजार और सहयोगी देश सांस थामे देख रहे हैं कि क्या कूटनीति जीतेगी या टकराव।