बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर अत्याचारों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। हिंदू बौद्ध ईसाई यूनिटी काउंसिल की रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में पूरे देश में 522 सांप्रदायिक हिंसा की वारदातें हुईं, जबकि अंतरिम सरकार ने महज 71 का उल्लेख किया। मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में यह विरोधाभास गंभीर सवाल खड़े करता है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में मोनिंद्र कुमार नाथ ने साल भर की मीडिया रिपोर्टों से संकलित आंकड़े जारी किए। भयावह आंकड़े: 66 की हत्या, 28 महिलाओं पर अत्याचार (बलात्कार समेत), 95 पूजा स्थलों पर आक्रमण, 102 आवास व कारोबार पर हमले।
इसके अलावा 38 उठाओ, लूट व मारपीट; 47 जान से मारने की धमकी व प्रहार; 36 अपवित्रता केस में पकड़ व तड़प; 66 संपत्ति हड़प। ढाका ट्रिब्यून ने इसे विस्तार से प्रकाशित किया।
फरवरी चुनावों के पूर्व 1-27 जनवरी में 42 घटनाएं: 11 कत्ल, एक दुष्कर्म, 9 मंदिर-गिरजाघर लूट, 21 चोरी-आग-अधिग्रहण।
अल्पसंख्यक मताधिकार चाहते हैं, किंतु भय व्याप्त। नाथ बोले, ‘हतोत्साहन की सारी गलती सत्ता, नौकरशाही, आयोग, पार्टियों की।’
यूनुस के पोस्ट पर प्रहार: 645 में 71 ही सांप्रदायिक? नाथ भड़के, ‘मंदिर बहार के अपराध सांप्रदायिक नहीं—यह भ्रम फैलाना है।’
नेताओं पर केस, चिन्मय दास जेल में, कई फरार। यूनुस काल में अराजकता बुलंद, हिंसा बेरोक—मानवाधिकार संगठन सतर्क।
यह दस्तावेज सरकार को अल्पसंख्यक हिफाजत के लिए जगाता है, वरना चुनावी लोकतंत्र खतरे में।