पाकिस्तान को अफगानिस्तान सीमा लंबे समय से बंद होने का गहरा आर्थिक आघात लग रहा है। खैबर पख्तूनख्वा प्रांत का राजस्व अक्टूबर 2025 से व्यापार निलंबन के कारण 53.02 प्रतिशत गिर गया है। प्रांत ने फेडरल सरकार से तुरंत कदम उठाने की अपील की है।
डॉन अखबार की खबर में बताया गया कि चालू वित्त वर्ष के सात महीनों में आईडीसी संग्रह घटकर 3.48 अरब रुपये पर सिमट गया। पिछले साल यह 7.42 अरब था। इससे विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
वित्तीय सलाहकार मुजम्मिल असलम ने मंत्री जम कमाल से आपात बैठक का अनुरोध किया है। चर्चा में आर्थिक क्षति, व्यापारियों की दिक्कतें, अटकी रकमें व ठप्प व्यापार शामिल।
“सीमा अवरोध प्रांत को राजस्व, विकास व नौकरियों के मोर्चे पर चोट पहुंचा रहे,” असलम ने कहा। अदालत के आदेश के बाद वसूली प्रयास हुए, लेकिन सीमा बंदी ने नाकाम कर दिया।
निर्यातक संकट में हैं, खेपें व पेमेंट फंसे हुए। कई फर्में सेस चुकाने से वंचित। कारण- अक्टूबर में तालिबान व पाक बलों की आठ दिवसीय मुठभेड़। वार्ताएं बेनतीजा।
लांडी कोटल में 4 जनवरी को भव्य धरना हुआ। काउंसिल के बैनर तले सभी वर्ग एकजुट। बोला गया कि सीमा बंदी से आदिवासी समुदाय तबाह हो रहा, तोरखम हजारों परिवारों का सहारा था।
तत्काल समाधान जरूरी, नहीं तो संकट गहराएगा।