रानी मुखर्जी, जो ‘मर्दानी’ फिल्मों से महिलाओं की ताकत का प्रतीक बनीं, ने हाल ही में महिलाओं के दोहरे स्वरूप पर खुलकर चर्चा की। उनका कहना है कि भारतीय महिलाएं स्वयं शक्ति का अवतार हैं।
बातचीत के दौरान रानी बोलीं, ‘सम्मानित होने पर महिलाएं देवी गौरी व पार्वती जैसी नरम होती हैं, लेकिन छेड़ो तो चंडी-दुर्गा बन जाती हैं। उन्हें कमजोर समझना सर्वोच्च मूर्खता है, वे तो हालात के साथ खुद बदल लेती हैं।’
वे हमेशा महिलाओं को उनके सर्वश्रेष्ठ रूप में प्रस्तुत करना चाहती हैं। चाहे घर संभालने वाली हो या पत्रकार, हर एक में सुपरपावर है। ये महिलाएं कामकाज को सुंदरता से अंजाम देती हैं और जिम्मेदारियों का बेहतरीन बैलेंस रखती हैं।
उच्च पदों पर महिलाएं भी रोजमर्रा की जिंदगी जीती हैं, मगर भावनात्मक मजबूती उन्हें हर संग्राम में विजयी बनाती है। ‘भारतीय महिला के नाते असली मर्दानी कौन, ये दुनिया को बताना मेरा फर्ज है,’ रानी ने जोर देकर कहा।
वे उन अनगिनत महिलाओं की तारीफ करती हैं जो चुपचाप परिवार व समाज की रीढ़ बनी रहती हैं। रानी के विचार महिलाओं को नई ऊर्जा देते हैं।