हाइपर एसिडिटी से जूझ रहे हैं? पेट में अम्ल की अधिकता आजकल आम हो गई है, जो गलत खानपान और बेढंगी लाइफस्टाइल से उपजती है। इससे जलन, खट्टी डकार, मुंह का खट्टा स्वाद, गैस और मतली जैसी परेशानियां सताती हैं।
तीखा-मसालेदार भोजन, तनाव, अनियमित भोजन समय और ज्यादा भूखे रहना इसके पीछे हाथ है। आयुर्वेदिक भाषा में अम्लपित्त के नाम से जाना जाता यह रोग आसान नुस्खों से काबू में आ सकता है। आयुष मंत्रालय की नई गाइड छोटे-छोटे बदलावों से पाचन को मजबूत बनाने का दावा करती है।
अम्ल बढ़ने पर पेट-छाती में दर्द, भारीपन और उल्टी की आशंका रहती है। सही कदम उठाकर इन्हें रोका जा सकता है।
भुने-पके, प्रोसेस्ड फूड से दूरी बनाएं। थोड़ा-थोड़ा बार-बार खाएं, प्यास न लगने दें। भरपूर पानी पिएं। शराब-सिगरेट त्यागें। समयबद्ध नींद लें। चिंता भगाने को ध्यान, योग या सैर करें।
इनसे एसिडिटी के साथ आंतों की सेहत भी सुधरती है। लगातार समस्या हो तो चिकित्सक जांच जरूरी। यह गाइड उन लोगों के लिए खासतौर पर उपयोगी है जो अक्सर पेट की परेशानी से त्रस्त रहते हैं।