कोलकाता के आनंदपुर में ‘वाओ! मोमो’ के वेयरहाउस में लगी आग ने 20 से अधिक जिंदगियां लील लीं, जिस पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने तुरंत संज्ञान लिया। 26 जनवरी की इस घटना में कई मजदूर सो रहे थे, जब अचानक धधकती आग ने सबकुछ राख कर दिया। आयोग ने जिलाधिकारी को नोटिस थमाते हुए तीन दिन में विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
मानवाधिकार अधिनियम 1993 की धारा 12 के तहत जारी इस नोटिस में प्रबंधन की लापरवाही और संबंधित विभागों की विफलता पर सवाल उठाए गए हैं। फायर सर्विसेज की धीमी प्रतिक्रिया, श्रम विभाग की अनदेखी और शहरी नियोजन की कमियां इस त्रासदी की जड़ हैं। शिकायतकार ने न्यायिक प्रावधानों का उल्लेख कर उच्च स्तरीय जांच, दोषी अधिकारियों पर सजा, परिवारों को सहायता राशि तथा पूरे पश्चिम बंगाल में सुरक्षा निरीक्षण की अपील की है।
एनएचआरसी सदस्य प्रियंक कानूनगो की अध्यक्षता वाली बेंच ने जांच को गति देने के लिए ईमेल रिपोर्ट का भी प्रावधान किया है। यह निर्देश श्रमिक अधिकारों की रक्षा में आयोग की प्रतिबद्धता दर्शाता है। घटना के बाद उभरे सवाल उद्योगों में सुरक्षा संस्कृति की कमी को उजागर करते हैं। आयोग की रिपोर्ट से उम्मीद है कि दोषियों को सजा मिलेगी और भविष्य में ऐसी दुर्घटनाएं रुकेंगी।