यूजीसी के नए रेगुलेशनों पर सुप्रीम कोर्ट की रोक के बाद किसान नेता राकेश टिकैत ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने चेताया कि ये नियम अदालती जंगों का सिलसिला शुरू करेंगे और सामाजिक एकता को खतरे में डालेंगे।
आईएएनएस को दिए बयान में टिकैत ने विरोध की श्रृंखला का जिक्र किया। ‘तीन दिनों के हंगामे से कोर्ट अलर्ट हुआ। दस्तावेज मंगाकर खामियों का पता लगेगा—सुधार या स्थगन का फैसला होगा।’
टिकैत ने कहा कि जिन जातियों को नुकसान का डर है, उनके साथ बातचीत अनिवार्य है। ‘ऐसे विवाद जारी रहे तो राष्ट्र जाति-आधारित टुकड़ों में बंटेगा, संकट के समय एकजुटता नामुमकिन।’
नियमों से सरकार को कोई नुकसान नहीं, ऐसा उनका मानना है। ‘वोट न देकर या नोटा से विरोध जताने वाले विपक्षी सत्ता को मजबूत करते हैं। सरकार अपने हित साधेगी।’
सरकार पर जातिवाद फैलाने का इल्जाम लगाते हुए टिकैत बोले, ‘पढ़े-लिखे वर्ग एससी जैसे समुदायों का शोषण करेंगे। संवैधानिक अधिकारों के तहत कोर्ट में केस होंगे, मुकदमेबाजी चरम पर।’
गुरुवार को अदालत ने चुनौती याचिकाओं पर नए यूजीसी नियमों को होल्ड कर दिया। 2012 के पुराने प्रावधान लागू रहेंगे जब तक 19 मार्च को सुनवाई न हो। शिक्षा सुधारों में आरक्षण बहस तेज हो गई है।