आईआरएडीई के वैश्विक परिप्रेक्ष्य सम्मेलन में पीएम प्रधान सचिव डॉ. पीके मिश्र ने भारत के ऊर्जा परिवर्तन को ग्लोबल साउथ के लिए आदर्श बताया। स्वच्छ ऊर्जा अब विकास का मूल तत्व है, जो अर्थव्यवस्था, समावेश और सुरक्षा को मजबूत करती है।
पीएम के भारत ऊर्जा सप्ताह संदेश का हवाला देकर उन्होंने स्वच्छता, हरित प्रगति और सतत जीवनशैली पर जोर दिया। दो प्रमुख पाठ: महत्वाकांक्षाएं संस्थागत समर्थन, वित्त और क्रियान्वयन से फलीभूत होती हैं—2030 लक्ष्यों को 2025 में पार करना इसका प्रमाण।
लोग-केंद्रित लाभ जरूरी: किसानों के लिए कुसुम, परिवारों के लिए सूर्य घर मुफ्त बिजली, रोजगार के लिए सौर और ईवी क्षेत्र। उत्सर्जन कटौती विकास को बल देती है।
विकासशील देशों के संक्रमण को न्यायोचित बनाएं, राष्ट्रीय भिन्नताओं को स्वीकारें। भारत का रिकॉर्ड बेजोड़—36% उत्सर्जन कमी, पेरिस लक्ष्य पूर्ववर्ती।
सौर मिशन वृद्धि, नीतिगत सुधार, हाइड्रोजन प्रोत्साहन, निजी न्यूक्लियर खुलासा क्रांतिकारी। ग्रामीण पुनरुद्धार में कुसुम अग्रणी। उपभोक्ता उत्पादक बने—विद्युतीकरण, एलईडी, लाइफ अभियान। पीएलआई से 120 जीडब्ल्यू क्षमता।
आईएसए नेतृत्व, पंचामृत, जीवनशैली परिवर्तन से जलवायु नेतृत्व। वित्त, प्रौद्योगिकी मांग। ग्रिड स्थिरता के लिए निवेश। भारत संतुलित मॉडल प्रस्तुत कर रहा है।