सर्वोच्च न्यायालय ने यूजीसी के विवादास्पद नए निर्देशों को ठहरा दिया और केंद्र व आयोग को नोटिस भेजे। इस कदम ने छात्र हितों की रक्षा की है। शिवसेना (यूबीटी) प्रवक्ता आनंद दुबे ने इसे सरकार की करारी हार माना और खुले दिल से समर्थन किया।
दुबे के अनुसार, नियमों में सामान्य वर्ग के छात्रों को झूठे आरोपों का कोई प्रतिकार न करने का अधिकार न देना गलत है। सरकार भेदभाव खत्म करने का दावा करती है, लेकिन ये प्रावधान उल्टा भेदभाव पैदा करते हैं। 2012 के नियम बेहतर थे, इन्हें क्यों बदला?
अदालत ने संज्ञान लेते हुए तुरंत प्रभाव से रोक लगाई और 19 मार्च को सुनवाई तय की। छात्र समुदाय में खुशी की लहर दौड़ गई। अभिभावक भी निश्चिंत हुए कि उनके बच्चों का भविष्य छोटे झगड़ों में न अटके।
धर्मेंद्र प्रधान के मंत्रालय को झटका लगा है। दुबे ने इन्हें असंवैधानिक बताते हुए अंबेडकर के आदर्शों का हवाला दिया। कानून की नजर में कोई बड़ा-छोटा नहीं। आगामी सुनवाई में इनकी पूरी तरह खारिज होने की उम्मीद है।