भारत-यूरोपीय संघ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट कपड़ा एवं गारमेंट उद्योग के लिए मील का पत्थर साबित हो रहा है। जानकारों का मानना है कि दो-तीन सालों में उद्योग का पूरा परिदृश्य बदल जाएगा, जिसमें शुरुआती दो वर्षों में 30-40 प्रतिशत की निर्यात वृद्धि होगी।
एईपीसी चेयरमैन प्रेमल उदानी ने जोर देकर कहा कि 11 प्रतिशत ड्यूटी हटने से भारतीय उत्पाद यूरोप में सस्ते हो जाएंगे। इससे बांग्लादेश को टक्कर देने की स्थिति बनेगी और बाजार हिस्सेदारी बढ़ेगी।
रामू आर ने कहा कि बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन होगा। तिरुपुर एक लाख करोड़ निर्यात लक्ष्य के करीब पहुंचेगा।
पीएम नरेंद्र मोदी ने इसे साझा समृद्धि का ब्लूप्रिंट करार दिया। 27 ईयू देशों वाले इस ऐतिहासिक समझौते से किसान, एमएसएमई और मैन्युफैक्चरिंग को फायदा होगा।
यह एफटीए निवेश आकर्षित करेगा, इनोवेशन पार्टनरशिप बनाएगा और सप्लाई चेन को सशक्त करेगा। उद्योग अब उत्पादन क्षमता बढ़ाने, स्किल डेवलपमेंट और ग्रीन टेक्नोलॉजी पर फोकस कर रहा है।
यह समझौता न केवल आंकड़ों को मजबूत करेगा, बल्कि भारत को वैश्विक कपड़ा बाजार का मजबूत खिलाड़ी बनाएगा। भविष्य उज्ज्वल दिख रहा है।