निष्क्रिय जीवनशैली ने बवासीर जैसी बीमारी को महामारी बना दिया है। कुर्सी पर घंटों बैठना, व्यायाम की कमी—ये सब कारण हैं। सर्जरी अस्थायी राहत देती है, लेकिन पुनरावृत्ति रोक नहीं पाती। आयुर्वेदिक नजरिए से कचनार की जड़ें ही असली हथियार हैं।
बुजुर्ग कचनार वृक्ष की जड़ें सुखाकर पिसवा लें। चूर्ण बनाकर अंदरूनी रूप से लें या हल्दी-नारियल तेल के साथ लेप बनाएं। बाहरी प्रयोग से मस्से धीरे-धीरे सिकुड़ते हैं और हमेशा के लिए अलविदा कह देते हैं। डॉक्टर की राय जरूरी है।
इसके अलावा फूलों से डायबिटीज कंट्रोल होता है और छाल सूजन व अन्य विकारों में रामबाण। हर्बल स्टोरों में उपलब्ध पाउडर से घर पर ही उपचार शुरू करें। प्राकृतिक तरीके से स्वस्थ रहें।