भारतीय सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी के ताजा नियमों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई के बाद रोक लगा दी। चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस बागची की खंडपीठ ने धारा 3सी में जातिगत भेदभाव वाले प्रावधानों को संदिग्ध पाते हुए अस्थायी आदेश जारी किया। मामला 19 मार्च को फिर आएगा।
याचिकाकर्ताओं ने वकील विष्णु शंकर जैन के माध्यम से दावा किया कि नियम छात्रों के जाति बताने पर एफआईआर और पूर्वाग्रही कमेटी के हवाले करने जैसे कदम संविधान के खिलाफ हैं। कोर्ट ने बहस सुनने के बाद प्रभावी रोक लगा दी।
बिहार उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा, ‘यह न्यायिक निर्देश है, जिसका कड़ाई से पालन होगा। सरकार न्यायपालिका के सम्मान में बंधी है।’ सुनील भराला ने यूजीसी को सवर्णों के खिलाफ विषाक्त नीति बनाने का दोषी ठहराया। देशभर में व्यापक विरोध के बाद यह कदम उठा।
पश्चिम बंगाल सीएम ममता बनर्जी के अजीत पवार वाले बयान पर चौधरी ने राजनीति बंद करने की नसीहत दी। परिवार का समर्थन है और जांच में कमी मिलेगी तो सख्ती होगी। भूमि के बदले नौकरी घोटाले पर उन्होंने त्वरित न्याय और अनुपालन का भरोसा दिलाया।
शिक्षा जगत में यह फैसला नीतिगत सुधारों की मांग को बल देगा, निष्पक्षता सुनिश्चित करते हुए।