भारत-यूरोपीय यूनियन फ्री ट्रेड एग्रीमेंट ने वापी के उद्योगी समुदाय को प्रफुल्लित कर दिया है। अमेरिका के टैरिफ से प्रभावित यह औद्योगिक केंद्र अब यूरोपीय बाजारों की ओर बढ़ने को तैयार है।
दस हजार से अधिक इकाइयों वाला वापी केमिकल, फार्मास्युटिकल, कपड़ा, इंजीनियरिंग क्षेत्रों का गढ़ है। विदेशी व्यापार में बाधा बन चुके यूएस टैरिफ के विकल्प के रूप में ईयू डील राहत लेकर आई है।
मंगलम ड्रग्स के डॉ. कमल वसी ने प्रतिक्रिया में कहा, ‘फार्मा इंडस्ट्री के लिए सभी यूरोपीय देश खुले बाजार हैं। टैरिफ मुक्त व्यापार से जेनेरिक दवाओं का निर्यात चरम पर पहुंचेगा।’
शरद ठाकर जैसे उद्योगपति इसे पीएम मोदी की बड़ी उपलब्धि मानते हैं। ‘यह सौदा अमेरिकी झटकों से उबरने का सुनहरा मौका देता है, यूरोप में कारोबार सरल बनेगा।’
सतीश पटेल, एसोसिएशन अध्यक्ष, ने कहा कि यह ‘मदर ऑफ ऑल डील’ कई सेक्टरों को लाभ देगी। ‘अमेरिकी नुकसान की भरपाई यूरोपीय बाजारों से होगी, विकसित भारत का लक्ष्य सशक्त होगा।’
यह समझौता व्यापक अवसर पैदा करेगा, जिसमें सस्ते आयात, रोजगार वृद्धि और तकनीकी प्रगति शामिल है। वापी वैश्विक व्यापार में अपनी स्थिति मजबूत करेगा।