बांग्लादेश में टेक्सटाइल संकट ने सूरत के व्यापारियों को नई उमंग भर दी है। बीटीएमए की एक फरवरी से प्रस्तावित हड़ताल भारत से सस्ते यार्न आयात से उपजी है, जिसने वहां की मिलों को नेस्तनाबूद कर दिया। कम कीमत और बेहतर क्वालिटी के आगे बांग्लादेश हार मान चुका है।
सूरत का 65 प्रतिशत पॉलिएस्टर उत्पादन अब बाजार पर कब्जा जमाने को बेताब है। एसोसिएशन प्रमुख कैलाश हाकिम ने बताया कि राजनीतिक अस्थिरता के बीच यह भारत के कपड़ा क्षेत्र के लिए बड़ा मौका है। बांग्लादेश हमेशा भारतीय कपड़ों पर निर्भर रहा, अब भारत पूर्ण रूप से आगे बढ़ेगा।
देशव्यापी योजनाओं से स्किल और इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत हो रहा है। सूरत में पार्ट्स क्वालिटी और एक्सपोर्ट रणनीति पर जोर है। आरएंडडी सेंटर की स्थापना से उद्योग नई ऊंचाइयों को छुएगा।
अक्षय राठौड़ जैसे व्यापारियों का मानना है कि यह सूरत के 65 प्रतिशत राष्ट्रीय व्यापार हिस्से को मजबूत करेगा। बांग्लादेश की गलतियां अब सूरत की पूंजी बनेंगी। युवा पीढ़ी प्रशिक्षण ले रही है और सरकारी मदद से सूरत विश्व पटल पर चमकेगा। आने वाला दौर भारतीय टेक्सटाइल का है।