भारत की सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था में पिछले वर्षों में अभूतपूर्व उन्नति हुई है। पेंशन तथा बीमा कवरेज में जबरदस्त वृद्धि ने करोड़ों नागरिकों को लाभ पहुंचाया, जैसा कि गुरुवार को संसद में प्रस्तुत आर्थिक सर्वेक्षण में उजागर हुआ।
सरकार के नियामकों आईआरडीएआई व पीएफआरडीए ने वंचितों तक पहुंच बढ़ाने के लिए क्रांतिकारी कदम उठाए हैं। इनसे वित्तीय सुरक्षा का जाल व्यापक बना है।
पेंशन क्षेत्र में एनपीएस, यूपीएस (2025), ईपीएफ व एपीवाई जैसी योजनाएं बहुआयामी संरचना प्रदान करती हैं। 2025 के अंत तक एनपीएस में 21.17 करोड़ ग्राहक और 16.1 लाख करोड़ की संपत्ति प्रबंधन था।
दशक भर में ग्राहक 9.5 प्रतिशत सीएजीआर से बढ़े, संपत्ति 37.3 प्रतिशत की रफ्तार से। एपीवाई ने 43.7 प्रतिशत ग्राहक वृद्धि और 64.5 प्रतिशत संपत्ति वृद्धि दिखाई।
बीमा उद्योग 2047 के ‘सभी के लिए बीमा’ विजन से प्रेरित है। आईआरडीएआई के नए ढांचे से अनुपालन सरल हुआ और नवाचार को बल मिला। डिजिटल संशोधनों से कवरेज लोकतांत्रिक बनी।
गैर-जीवन बीमा में स्वास्थ्य क्षेत्र 41 प्रतिशत प्रीमियम का दबदबा रखता है। क्लेम 1.9 लाख करोड़ तक पहुंचे, 70 प्रतिशत की छलांग के साथ। जीवन बीमा 91 प्रतिशत संपत्ति व 75 प्रतिशत आय का स्वामी है।
जीएसटी राहत और 2025 अधिनियम से सस्ते बीमा व 100 प्रतिशत विदेशी निवेश संभव हुआ। यह सर्वेक्षण भारत की सुरक्षित भविष्य की कहानी बयान करता है।