फिल्मकार विवेक रंजन अग्निहोत्री ने ‘द बंगाल फाइल्स’ की कठिन यात्रा पर खुलकर बात की। ‘ताशकंद फाइल्स’ और ‘कश्मीर फाइल्स’ के बाद यह ट्रायलॉजी का अंतिम अध्याय है, जो बंगाल के दर्दनाक इतिहास—डायरेक्ट एक्शन डे, नोआखली हत्याकांड और विभाजन के नरसंहार—को उजागर करता है।
प्रोडक्शन के दौरान पहला बड़ा झटका लगा जब रजत पोद्दार का निधन हुआ। सेट तैयार हो रहे थे, टीम स्तब्ध थी, लेकिन संकल्प से काम पूरा किया। विवेक ने बताया, ‘यह साल चुनौतियों भरा था।’
रिलीज के समय कोलकाता में हिंसा, लगातार धमकियां और बंगाल में छिपा बैन सामने आया। सेंसर बोर्ड ने मंजूरी दी, किंतु राज्य स्तर पर रोक। थिएटरों पर राजनीतिक दबाव, पुलिस की धमकी से कोई सिनेमा हॉल तैयार न हुआ। प्रमुख चेनें भी असफल रहीं।
विवेक बोले, ‘मिडिल क्लास से लेकर फिल्ममेकर्स तक ने कोशिश की, लेकिन कुछ ताकतें हावी रहीं। यह फ्री स्पीच की हार है।’ शोध की जरूरत है ऐसी शक्तियों पर।
फिल्म ने जहां पहुंची, सच्चाई का बोध कराया। इतिहास के साथ वर्तमान सत्य दबाने की साजिश उजागर हुई। ‘अर्बन नक्सल’ के लेखक विवेक ने चेतावनी दी—भारत का भविष्य दांव पर है। चुनौतियों के बावजूद जीत हमारी हुई।