आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में उत्साहजनक खुलासा हुआ है कि वित्त वर्ष 2027 में भारत की जीडीपी ग्रोथ 7 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। गुरुवार को संसद में पेश यह रिपोर्ट तीन साल पुराने 6.5 प्रतिशत के अनुमान से आगे है और वैश्विक संकटों के बावजूद आंतरिक शक्ति पर जोर देती है।
लोकसभा में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बताया कि दस सालों में बुनियादी ढांचे में क्रांति आई। विमानपत्तनों की संख्या दोगुनी, जलमार्गों से कार्गो परिवहन तेज, लॉजिस्टिक्स लागत घटी और समग्र उत्पादकता ऊंची हुई।
मुख्य महंगाई नियंत्रण में है, भले खाद्य वस्तुओं और कीमती धातुओं में अस्थिरता हो। मजबूत आपूर्ति प्रणाली, बढ़ता उत्पादन और बेहतर परिवहन इसका श्रेय देते हैं।
राज्य स्तरीय नियम सरलीकरण ने छोटे-मध्यम कारोबारों को औपचारिक क्षेत्र से जोड़ा, विकास संभावनाओं को विस्तार दिया। केंद्र सरकार की नीतियां विकास और वित्तीय अनुशासन का संतुलन रेखांकित करती हैं।
घाटा नियंत्रण से सीख मिली कि मध्यम लक्ष्यों वाली लचीली नीतियां विकास को बढ़ावा देती हैं। 2021-22 के बजट में निर्धारित 4.5 प्रतिशत से नीचे घाटा लाने की योजना ने कैपेक्स को सुरक्षित रखा।
वैश्विक भू-राजनीति के बदलावों में भारत को सशक्तिकरण, निरंतर इनोवेशन और ‘विकसित भारत’ पर अडिग रहना चाहिए। सीईए वी. अनंत नागेश्वरन ने आंकड़ों को सकारात्मक दिशा का प्रमाण माना।