बांग्लादेश में फरवरी 2024 के आम चुनाव नजदीक आते ही राजनीतिक दलों के बीच तल्खियां बढ़ गई हैं। बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) ने जमात-ए-इस्लामी पर फासीवादी प्रचार, पाखंड और वोटरों को भटकाने का इल्जाम ठोंका है।
ढाका प्रेस कॉन्फ्रेंस में बीएनपी चुनाव समिति के महदी अमीन ने जमात के उस दावे को खारिज किया जिसमें वे बीएनपी को भ्रष्टाचार का सरताज बता रहे हैं। इसे उन्होंने खालिस राजनीतिक चालबाजी कहा, जो हकीकत से कोसों दूर है।
उन्होंने तंज कसा कि बीएनपी के 2001 से 2006 के दौर में जमात के पास सत्ता का स्वाद चखने का मौका था, लेकिन तब भ्रष्टाचार पर उनकी जुबान बंद थी। ‘चुनाव के समय वही फासिस्ट प्रोपेगेंडा फिर से चालू—सिर्फ ढोंग,’ ढाका ट्रिब्यून ने उनके हवाले से लिखा।
अमीन ने खुलासा किया कि जमात धरती पर जन्नत, कुरान की कसमें और नकदी के लालच से वोट खरीद रही है। ‘वोट बेचने वालों का भ्रष्टाचार पर उपदेश? हास्यास्पद!’ उन्होंने चुटकी ली।
बीएनपी नेता ने आगाह किया कि ये हरकतें चुनाव कोड तोड़ती हैं और लोकतांत्रिक मूल्यों पर चोट करती हैं। चुनाव आयोग से फर्जी खबरें और कट्टर राजनीति रोकने की गुजारिश की।
पार्टी जमात के खेल बेनकाब करती रहेगी। ठाकुरगांव-1 से मैदान में मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर ने बीडी हाई स्कूल मैदान पर रैली में कहा, ‘1971 युद्ध में पाकिस्तानी सेना के सहयोगी आज शासन चाहते हैं। उन्हें चुनकर देश न बर्बाद करें।’ द डेली स्टार के मुताबिक, ‘पाक दमन से आजादी पाई। 1971 की विरासत बचानी है—ये हमारी असली पहचान।’
आरोप-प्रत्यारोपों के सिलसिले ने बांग्लादेश चुनाव को रोमांचक बना दिया है। पार्टियां अपनी रणनीतियां तेज कर रही हैं।