प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बजट सत्र को विकसित भारत 2047 की दिशा में नई ऊर्जा का प्रतीक बताया। संसद भवन में पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने जोर दिया कि सरकार पुरानी समस्याओं से ऊपर उठकर दीर्घकालिक उपायों पर केंद्रित है और ‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ को और तेज करने के लिए संसदीय सहयोग का स्वागत है।
सत्र की शुरुआत भारत-ईयू एफटीए वार्ता की सकारात्मक प्रगति के साथ हुई, जो महत्वाकांक्षी भारत की पहचान को रेखांकित करती है। राष्ट्रपति अभिभाषण को उन्होंने 1.4 अरब जनता की आशाओं का सटीक चित्रण बताया। सांसद सरल शब्दों में व्यक्त अपेक्षाओं पर ध्यान देंगे।
सदी का 25 प्रतिशत बीत चुका, शेष तिमाही भारत को वैश्विक पटल पर स्थापित करेगी। निर्मला सीतारमण का नौवां लगातार बजट संसदीय गौरव बढ़ाता है।
भारत आशा और आकर्षण का केंद्र है। आर्थिक व लोकतांत्रिक ताकत पर विश्वास बढ़ा है। एफटीए से निर्माताओं को वैश्विक बाजारों में विस्तार का मौका मिलेगा, गुणवत्ता सुनिश्चित करनी होगी।
‘सुधार, प्रदर्शन, बदलाव’ सरकार का ध्येय है। रिफॉर्म एक्सप्रेस तेज हो रही है। स्थायी समाधान विश्वास जगाते हैं। निर्णय प्रगति, विकास और जन-केंद्रित हैं। तकनीक अपनाएंगे, पर मानवीय दृष्टि से समझौता नहीं। संविधान के मूल्यों के साथ आगे बढ़ेंगे।
लोकतंत्र में विविध मत स्वाभाविक, लेकिन अंतिम व्यक्ति तक पहुंच पर सहमति है। यह वास्तविक बदलाव लाता है। सुधारों की यह गाड़ी भावी सुधार ले जाएगी। भारत का लोकतंत्र हमारी क्षमता, मूल्यनिष्ठा और निर्णय प्रक्रिया का प्रमाण है, जो विश्व स्वीकार कर रहा है।