पाकिस्तान की स्थिरता की कहानी अब सैन्य प्रभुत्व की कठोर हकीकत बन चुकी है। रिपोर्ट बताती है कि असहमति कुचलकर और बाहरी शक्तियों की समर्थन से बनी यह छवि टिकाऊ नहीं। हाइब्रिड सिस्टम जनता का विश्वास हासिल नहीं कर सका, बल्कि पतन के संकेत खुद दिखा रहा है।
इस्लामाबाद के सुरक्षा विशेषज्ञ इम्तियाज गुल ने ईस्ट एशिया फोरम में लिखा कि 2025 में सेना का कब्जा तय हो गया। छद्म नागरिक शासन अब खुले सैन्य राज में बदल गया।
न्यायिक स्वतंत्रता घटी, संसदीय भूमिका सीमित हुई, विधायक सैन्य आज्ञाकार। 2024 चुनावों वाली असेंबली सैन्य समर्थकों से भरी। विधायी बदलावों ने सत्ता सैनिकों के हवाले कर दी, स्थिरता को लोकतंत्र से ऊपर रखा।
इमरान खान का सफर और कठिन। 2023 से जेल में राजनीतिक आरोपों पर, उनकी हिरासत ने हंगामा मचाया। समर्थक अमेरिकी रिपब्लिकनों और ट्रंप सहयोगियों तक पहुंचे, पर सफलता न मिली। संयुक्त राष्ट्र ने 2025 में जेल की क्रूरता पर सवाल उठाए।
ट्रंप का मुनीर के प्रति उत्साह खान की रिहाई की संभावनाएं समाप्त कर गया। 180+ केस लंबित। अमेरिका-चीन-रूस तनाव में पाक सैन्य नेतृत्व वाशिंगटन से जुड़ गया, जिससे आलोचना गुम।
चेतावनी साफ है: पाकिस्तान का दबा असंतोष फूट सकता है, सैन्य व्यवस्था खुद को नष्ट कर सकती है। जनता का भरोसा टूट चुका।