पश्चिम बंगाल में सियासी घमासान के बीच भारत निर्वाचन आयोग ने राज्य के 15 आईएएस और 10 आईपीएस अधिकारियों को अन्य राज्यों की एसआईआर अभियान के लिए एसआरओ के रूप में तैनात करने का ऐलान किया। नबन्ना को मिले पत्र में बुधवार को यह जानकारी साझा की गई।
अधिकारियों को 5 और 6 फरवरी को ट्रेनिंग के लिए बुलाया गया है, उसके बाद उनके स्टेट असाइनमेंट तय होंगे। राज्य सरकार के तीन पत्रों को अनदेखा करने से मजबूर होकर आयोग ने खुद अधिकारियों का चयन किया।
सूची में गृह सचिव जगदीश प्रसाद मीना का नाम होने से हंगामा मच गया। तृणमूल के जयप्रकाश मजूमदार ने आयोग पर भाजपा के इशारे पर काम करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पांच राज्यों के चुनावों से पहले यह भाजपा की चाल है।
“गैर-चुनावी राज्यों के अधिकारी इस्तेमाल हो सकते थे, भाजपा जानबूझकर विवाद रच रही है,” मजूमदार बोले। भाजपा के जगन्नाथ चट्टोपाध्याय ने इसे सामान्य प्रक्रिया बताया।
यह विवाद बंगाल में केंद्र-राज्य संबंधों और चुनावी तैयारियों की जटिलताओं को रेखांकित करता है। इन एसआरओ की तैनाती से मतदाता सूचियों में पारदर्शिता बढ़ेगी, लेकिन राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप जारी रहेंगे। आयोग की यह रणनीति भविष्य के हस्तक्षेपों का संकेत दे सकती है।