दिल्ली की एनसीसी रैली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को भारत-यूरोपीय संघ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट को ऐतिहासिक बताया। इसे ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ कहते हुए उन्होंने जोर दिया कि यह ‘मेक इन इंडिया’ व वैश्विक निर्यात को नई दिशा देगा। युवा वर्ग के लिए यह स्वर्णिम अवसर है।
उन्होंने कहा कि वैश्विक पटल पर इस सौदे को गेमचेंजर माना जा रहा है, जो वैश्विक जीडीपी का 25 प्रतिशत व व्यापार का 33 प्रतिशत कवर करता है। ओमान, न्यूजीलैंड, यूके, यूएई, ऑस्ट्रेलिया व मॉरीशस के साथ पूर्व समझौते युवाओं के लिए लाखों नौकरियां रच रहे हैं।
इस 27 देशों वाले एफटीए से स्टार्टअप्स को फंडिंग व पारिस्थितिकी तंत्र में आसानी मिलेगी। सिनेमा, गेम्स, मॉडलिंग, डिजिटल मीडिया, संगीत व डिजाइन जैसे क्षेत्र फलेंगे-फूलेंगे। शिक्षा, अनुसंधान, सूचना प्रौद्योगिकी व पेशेवर सेवाओं में भी द्वार खुलेंगे।
आत्मनिर्भरता को बल मिलेगा। 99 प्रतिशत निर्यात पर टैरिफ खत्म या कम होगा। वस्त्र, चमड़े के सामान, रत्न, जूते व अभियांत्रिकी क्षेत्रों को प्रोत्साहन मिलेगा। हस्तशिल्पी व लघु उद्योग 27 यूरोपीय बाजारों तक पहुंचेंगे।
विदेशी निवेश से नई फैक्ट्रियां बनेंगी—इलेक्ट्रॉनिक्स, रसायन, औषधि आदि में। कृषि उत्पाद, खाद्य प्रसंस्करण व समुद्री उत्पादों के लिए निश्चित बाजार बनेगा। किसान, मछुआरे व ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। युवाओं को 27 देशों में रोजगार के रास्ते मिलेंगे।