फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने ग्रीनलैंड पर अमेरिकी दबाव को यूरोप के लिए ‘जागरण का संकेत’ करार दिया। बुधवार को पेरिस में डेनमार्क व ग्रीनलैंड नेताओं के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने इस मुद्दे पर पूर्ण समर्थन जताया।
उन्होंने बताया कि यह स्थिति यूरोपीय संप्रभुता को सशक्त बनाने, आर्कटिक क्षेत्र की रक्षा, बाहरी दखलंदाजी व भ्रामक प्रचार से निपटने, जलवायु संकट से लड़ाई तथा सतत विकास व निर्भरता कम करने वाली साझेदारियों की मांग करती है। मैक्रों ने कहा, फ्रांस यूरोपीय संघ के साथ संप्रभुता व अखंडता के सिद्धांतों पर दृढ़ है और यूएन चार्टर के तहत इनकी हिफाजत करेगा।
डेनमार्क की पीएम मेटे फ्रेडरिक्सन ने नाटो से ग्रीनलैंड व उत्तरी क्षेत्र में बढ़ी भूमिका की मांग की। ग्रीनलैंड के पीएम जेन्स-फ्रेडरिक नीलसन ने 22 जनवरी को नूक में कहा था कि संप्रभुता उनकी लाल रेखा है, चाहे अमेरिका कितना भी दबाव डाले। ‘हम डेनमार्क का हिस्सा बने रहेंगे,’ उन्होंने जोर दिया।
डेनमार्क के स्वशासित क्षेत्र ग्रीनलैंड में रक्षा व कूटनीति कोपेनहेगन संभालता है। ट्रंप के 2025 में सत्ता लौटने के बाद उनकी अधिग्रहण इच्छा को यूरोप ने खारिज किया। बर्फ पिघलने से आर्कटिक संसाधनों पर नजरें टिकी हैं, और मैक्रों का आह्वान यूरोप को एकजुट कर रहा है।