विधानसभा में बुधवार को केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं पर विपक्षी हमलों को सिरे से नकार दिया। उन्होंने जोर देकर कहा कि केरल स्वास्थ्य के क्षेत्र में देशभर के लिए प्रेरणा स्रोत बना रहेगा।
यूडीएफ द्वारा लाए गए स्थगन प्रस्ताव पर बोलते हुए सीएम ने सरकार के क्रांतिकारी कदमों का जिक्र किया। ‘आर्द्रम मिशन’ ने सरकारी चिकित्सालयों को नया आयाम दिया, रोगी सुविधाओं को उन्नत किया और आधारभूत स्वास्थ्य सेवाओं को सशक्त बनाया।
कोविड संकट में केरल का प्रबंधन वैश्विक स्तर पर सराहा गया। फिर भी विपक्ष दुर्लभ चूक को सिस्टम की हार बताने पर तुला है, जो इसकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाता है। सरकार हर खामी पर तत्काल कार्रवाई करती है।
विपक्ष नेता वी.डी. सतीशन ने सरकार पर स्वास्थ्य पतन का इल्जाम लगाया। उन्होंने कर्मचारी अभाव, आपातकालीन व्यवस्थाओं की कमी, इलाज में विलंब, मेडिकल त्रुटियां और अपर्याप्त इंफ्रास्ट्रक्चर के उदाहरण दिए।
उन्होंने कहा कि जांच पैनल जवाबदेही तय नहीं करते, पुराने मेडिकल कॉलेज नजरअंदाज हो रहे और निजी इलाज का बोझ जनता पर है। स्वास्थ्य व्यवस्था ‘सांसों पर सांसें’ ले रही।
यह राजनीतिक संवाद केरल में ध्रुवीकरण को उजागर करता है। सरकार सुधारों का बखान कर रही तो विपक्ष आलोचना पर अड़ा। चुनाव नजदीक आते ही यह जंग और भड़केगी।