27 जनवरी को विश्व भर में होलोकॉस्ट स्मरण दिवस के रूप में चिह्नित किया जाता है, जो नाजी क्रूरता के विरुद्ध सजगता का संदेश देता है। भारत के आयोजन में विदेश सचिव विक्रम मिस्री की मौजूदगी ने इसकी गरिमा बढ़ाई।
इजरायल के राजदूत रियूवेन अजार ने इसे यहूदियों को समाप्त करने की साजिश की अंतरराष्ट्रीय पहचान का दिन बताया। ‘यह नस्लवादी जहर द्वितीय विश्व युद्ध में जर्मनी से यूरोप भर फैला,’ उन्होंने कहा।
ऐसी त्रासदियों की पुनरावृत्ति रोकने हेतु स्मरण अनिवार्य है, यह कहते हुए अजार ने वैश्विक भागीदारी की सराहना की और मिस्री का विशेष आभार माना।
उन्होंने होलोकॉस्ट स्मृति गठबंधन का जिक्र किया, जो शिक्षा के माध्यम से यहूदी-द्वेष मिटाने में लगा है। भारत जैसे देशों के जुड़ाव का स्वागत किया।
हिटलर के नेतृत्व में नाजियों ने 60 लाख यहूदियों समेत रोमा, सिंती जनों का कत्लेआम किया। 81 वर्ष पूर्व आउशविट्ज मुक्ति की तारीख आज भविष्यを守ने का प्रतीक बनी है।
यह दिवस हमें सिखाता है कि भूलना सबसे बड़ा खतरा है। एकजुट प्रयासों से ही हम ‘फिर कभी नहीं’ का वादा निभा सकते हैं।