बजट सत्र का आगाज राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के प्रभावशाली संबोधन से हुआ। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने इसे व्यापकता, दूरदृष्टि और विजन से ओतप्रोत बताया।
एक्स पर अपनी प्रतिक्रिया में उन्होंने राष्ट्रपति के भाषण को भारत की विकास गाथा का स्पष्ट चित्रण कहा। यह आने वाले समय के लिए एक सशक्त रणनीति भी रेखांकित करता है।
राष्ट्रीय प्रगति के समस्त पहलुओं को समाहित करते हुए यह अभिभाषण समग्र, लोककेंद्रित विकास के प्रति अटूट निष्ठा जाहिर करता है। समाज के हर वर्ग को जोड़ते हुए विकसित भारत की साझा आकांक्षा को मजबूत करता है।
अध्यक्ष ने 21वीं शताब्दी के पहले पच्चीस वर्षों में प्राप्त विजयों का वर्णन किया। दस वर्षों में आधारभूत संरचना, रेलवे, सुरक्षा, स्पेस, उद्यमिता और कल्याण योजनाओं में अभूतपूर्व उन्नति हुई। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ ने वैश्विक पटल पर भारत की वीरता प्रदर्शित की।
डॉ. अंबेडकर के सिद्धांतों का हवाला देकर कहा गया कि सरकार वंचितों, आदिवासियों, पिछड़ों के प्रति सजग है। ‘सबका साथ, सबका विकास’ का संदेश सर्वव्यापी है। 25 करोड़ से अधिक लोग निर्धनता के चक्रव्यूह से बाहर आए।
महिला सशक्तीकरण पर जोर देते हुए 10 करोड़ से ज्यादा महिलाओं के स्वयं सहायता समूहों में जुड़ाव और लखपति दीदियों की संख्या में उछाल का जिक्र किया।
सत्र 2 अप्रैल 2026 तक निर्धारित है, जिसमें 29 जनवरी को आर्थिक सर्वेक्षण तथा 1 फरवरी को बजट पेश होगा।