2025 भारत के रक्षा प्रौद्योगिकी क्षेत्र के लिए मील का पत्थर साबित हुआ, जब फंडिंग 247 मिलियन डॉलर के अब तक के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई। डेटा प्लेटफॉर्म ट्रैक्सन की रिपोर्ट ने इस तेजी का ब्योरा पेश किया है।
232 फंडिंग दौरों से कुल 711 मिलियन डॉलर जुटे हैं। 2016 के 5 मिलियन से 2025 के शिखर तक का सफर निवेशकों की रुचि को प्रमाणित करता है।
एक 100 मिलियन डॉलर के बड़े दौर ने वृद्धि को गति दी। दौर 30 रहने के बावजूद कुल राशि दोगुनी हो गई, जो गुणवत्ता पर फोकस दर्शाता है।
स्टेज के हिसाब से सीड ने 174 दौरों में करीब 118 मिलियन, अर्ली स्टेज ने 56 में 527 मिलियन और लेट स्टेज ने 5 में 66 मिलियन डॉलर हासिल किए।
पूंजी वितरण में इंफ्रास्ट्रक्चर का दबदबा: गैर-लड़ाकू को 551 मिलियन, हथियार सिस्टम को 106 मिलियन, सक्षमीकरण को 27 मिलियन और ट्रेनिंग को 27 मिलियन डॉलर।
फंडिंग में बेंगलुरु अव्वल (216 मिलियन/61 दौर), नोएडा दूसरे (168/19) और चेन्नई तीसरे (88/26) स्थान पर। ये हब डिफेंस इनोवेशन के केंद्र हैं।
इकोसिस्टम अब एकल प्लेटफॉर्म से आगे एकीकृत सिस्टम की ओर अग्रसर है—एआई, ऑटोनॉमी, आईएसआर, सुरक्षित कम्युनिकेशन और उत्पादन क्षमता के साथ। राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए यह बड़ा कदम है।