लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने बजट सत्र आरंभ होने से ठीक पहले राष्ट्रपति के अभिभाषण की महत्ता रेखांकित की। उन्होंने इसे केवल परंपरागत नहीं, बल्कि राष्ट्रव्यापी मार्गदर्शन का माध्यम बताया।
एक्स पर पोस्ट करते हुए बिरला ने उल्लेख किया कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू आज 11 बजे संसद के संयुक्त सत्र को संबोधित करेंगी। ‘यह संदेश परंपरा से आगे बढ़कर देश को दिशा देता है। इसमें नीतियों, निर्णयों और कार्यक्रमों की रूपरेखा उभरती है, जो विकास पथ का सारांश प्रस्तुत करता है।’
उन्होंने कहा कि यह लोकतंत्र का प्रतीक है, जहां जनाकांक्षाएं नीतियों का आधार होती हैं और संसद उन्हें साकार करती है। बजट इतिहास पर वीडियो साझा कर बिरला ने प्रगति की कहानी सुनाई।
स्वतंत्रता के प्रारंभ में 197 करोड़ का बजट, 2.78 लाख करोड़ अर्थव्यवस्था के साथ। प्राथमिकताएं: खाद्य, प्रशासन, बुनियादी ढांचा। हरित क्रांति काल में निवेश से अनाज स्वावलंबन।
1991 सुधारों के बाद उछाल: 1991-92 का 1 लाख करोड़ बजट (270 अरब डॉलर जीडीपी), 2000-01 में 3-4 लाख करोड़ (468 अरब), 2010-11 में 10-12 लाख करोड़ (1.67 ट्रिलियन), 2020-21 में 35 लाख करोड़ (2.67 ट्रिलियन)।
वर्तमान में 50 लाख करोड़ से अधिक बजट, 4 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था – 25 हजार गुना बढ़ोतरी। फोकस अब विशाल इंफ्रास्ट्रक्चर, एक्सप्रेसवे, रेलवे, एयरपोर्ट्स, डिजिटल क्रांति, स्टार्टअप्स, रक्षा उत्पादन, नवीकरणीय ऊर्जा, एआई, डेटा केंद्र, चिप निर्माण, मेकिंग और आत्मनिर्भरता पर।
यह ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य सत्र को नई गति देगा, जहां अभिभाषण नीतिगत बहसों का केंद्र बनेगा।