अमेरिकी सीनेटर मार्क वॉर्नर ने भारत-पाकिस्तान सीमा तनाव के समाधान में वाशिंगटन की भूमिका को जरूरत से ज्यादा चमकाने पर तीखा प्रहार किया है। इंटेलिजेंस कमेटी चेयरमैन ने आगाह किया कि यह प्रवृत्ति कूटनीति को जटिल बना सकती है और क्षेत्रीय शांति को खतरे में डाल सकती है।
विशेष बातचीत में वॉर्नर ने कहा कि तथ्य बताते हैं- मुद्दा भारत-पाकिस्तान के आपसी प्रयासों से निपटा गया। भारतीय नेताओं, जासूसी रिपोर्टों और कमेटी विश्लेषण यही पुष्टि करते हैं। ट्रंप की कथित मध्यस्थता को वे निराधार ठहराया।
टकराव गंभीर था, पर नया नहीं। आतंकी घटनाओं से प्रेरित यह चक्र पुराना है। दोनों राजधानियों के बीच बातचीत के रास्ते सक्रिय रहे।
अमेरिकी योगदान को फुलाकर दिखाने से मित्र देश नाराज हो सकते हैं। भारत-अमेरिका व्यापारिक झड़पें इसी से जुड़ी लगती हैं, जहां सीजफायर क्रेडिट का विवाद है। ट्रंप की ईरान नीति का हवाला देते हुए वॉर्नर बोले- जीत का ढिंढोरा पीटना आसान, पूर्ण सफलता दुर्लभ।
इससे विश्वासघात का खतरा, रक्षा साझेदारी पर असर। भारत रातोंरात सहयोगी नहीं बदल सकता। पाकिस्तान की भारत-केंद्रित मानसिकता उसके आर्थिक संकटों को भी जोड़ती है, जबकि भारत अमेरिका के प्रति सकारात्मक है।
वॉर्नर ने सलाह दी- लंबी अवधि के संबंधों पर ध्यान दें, अतिशयोक्ति से बचें।