लखनऊ। भ्रष्टाचार के आरोपों से जूझ रहे अयोध्या के जीएसटी डिप्टी कमिश्नर प्रशांत कुमार सिंह ने सीएम योगी, पीएम मोदी और सरकार के समर्थन में इस्तीफा सौंप दिया। इस कदम को समाजवादी पार्टी के रविदास मेहरोत्रा ने खारिज करते हुए इसे जांच छोड़ने की चाल बताया।
मेहरोत्रा ने लखनऊ में कहा कि शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बरेली मजिस्ट्रेट ने साहस दिखाया। लेकिन जांचाधीन अधिकारी का यह स्टेज्ड इस्तीफा महज ढोंग है। शंकराचार्य 10 दिनों से अहिंसक धरने पर हैं, सरकारी बयानों से अपमानित हो रहे हैं—फिर इसकी क्या प्रासंगिकता?
उन्होंने भाजपा पर तीखा प्रहार किया—महंगाई, बेरोजगारी, अपराध वृद्धि, खराब स्वास्थ्य-सेवा और शिक्षा पर मौन। यूजीसी नियम शिक्षा सुधार का बहाना हैं, असल में सरकारी हस्तक्षेप बढ़ाने का। छात्र-शिक्षक आंदोलन को कुचलने की साजिश।
सिंह का कहना है कि यह संविधानिक कर्तव्य है। लेकिन सपा का दावा है कि यह भ्रष्टाचार से बचने का रास्ता। यूपी में यह विवाद राजनीतिक ध्रुवीकरण को तेज कर रहा है, जहां सत्य और स्वार्थ की लड़ाई जारी।