धार्मिक राजधानी उज्जैन एक बार फिर सांस्कृतिक रंगों से सराबोर हो जाएगी। सम्राट विक्रमादित्य को श्रद्धांजलि स्वरूप विक्रमोत्सव 15 फरवरी से शुरू होकर 19 मार्च तक धारावाहिक उत्साह बिखेरेगा। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने तैयारियों का जायजा लेते हुए सभी कार्यक्रमों को अंतिम रूप प्रदान किया।
शिवरात्रि पर भव्य उद्घाटन के साथ मेले, कलश यात्राएं और कलात्मक ‘शिवोहम’ प्रस्तुति होगी। फरवरी के मध्य में थिएटर महोत्सव रंगमंच को जीवंत करेगा, जिसमें वैश्विक स्तर के नाटक दिखेंगे।
अंतरराष्ट्रीय इतिहास परिषद, कठपुतली मेला और शोध गोष्ठियां फरवरी अंत में आयोजित होंगी। शासन व न्याय व्यवस्था पर विमर्श मार्च की शुरुआत में होगा। कवि सम्मेलन काव्य रस से ओतप्रोत होगा।
अंतरराष्ट्रीय पौराणिक फिल्म उत्सव, वैदिक अंताक्षरी और पारंपरिक पूजाएं विविधता जोड़ेंगी। शिप्रा तट पर अंतिम दिवस पुरस्कार समारोह, पंचांग लोकार्पण और नृत्य-नाट्य से गूंजेगा।
मुख्यमंत्री ने जोर दिया कि विक्रमादित्य के वैज्ञानिक दृष्टिकोण, खगोलीय ज्ञान और शासन कला को युवाओं तक पहुंचाया जाए। तकनीकी संस्थानों के माध्यम से विशेष सत्र आयोजित कर सांस्कृतिक धरोहर को मजबूत बनाएं। विक्रमोत्सव इतिहास को जीवंत करने का सशक्त माध्यम सिद्ध होगा।