एनएसई प्रमुख आशीष चौहान का मानना है कि भारत-ईयू एफटीए श्रम-आधारित क्षेत्रों के लिए रोजगार के नए द्वार खोलेगा। मंगलवार को उन्होंने जोर देकर कहा कि इससे यूरोप के बाजारों तक पहुंच सरल होगी और देश में नई नौकरियां बढ़ेंगी।
‘ट्रेड डील्स की जननी’ कही गई यह डील वाकई इतिहास रचेगी। दोनों की अर्थव्यवस्थाएं वैश्विक जीडीपी का एक-चौथाई हैं, व्यापार 220 अरब डॉलर—वस्तु 135 अरब, सेवा 85 अरब। बहुपक्षीय व्यापार कमजोर पड़ने पर द्विपक्षीय कदम स्वागतयोग्य है।
पीएम मोदी के अनुसार, यह केवल व्यापारिक नहीं, समृद्धि का ब्लूप्रिंट है। किसान व लघु उद्योग ईयू पहुंच सकेंगे, उत्पादन क्षेत्र मजबूत होगा, सेवाओं में साझेदारी गहरी।
बजट की उम्मीदों पर चौहान ने कहा, प्रत्येक क्षेत्र की अपेक्षाएं हैं, लेकिन सरकार वित्तीय स्थिति देखेगी। कोविड काल में भी राजकोषीय नियंत्रण बरकरार रहा। टैक्स राहत राजस्व पर निर्भर।
कुल मिलाकर, यह समझौता भारत के श्रम बल को लाभ पहुंचाएगा, वस्त्र, कृषि, हस्तशिल्प जैसे क्षेत्र फले-फूलेंगे, बेरोजगारी घटेगी और अर्थव्यवस्था नई ऊंचाइयों को छुएगी।