पाकिस्तान में पत्रकारों और आलोचकों पर कहर बरपा है। राज्य संस्थानों की आलोचना पर कानूनी हथियार चला कर उन्हें गिरफ्तार किया जा रहा है। वहीं, मोस्ट वांटेड आतंकी संगठन खुलेआम सक्रिय हैं।
ये गुट धन संग्रह, नौजवानों की भर्ती, जिहाद प्रचार और हिंसक विस्तार की साजिशें रच रहे हैं बिना किसी रोकटोक के।
तुर्की की पत्रकार उजाय बुलुत ने पीजे मीडिया में पश्चिम की पाकिस्तान नीति को भ्रामक और सिद्धांतविहीन बताया है।
एक एटीसी ने इमरान खान समर्थक आठ पत्रकारों व टिप्पणीकारों को अनुपस्थिति में उम्रकैद ठोकी। न्यूयॉर्क निवासी एक को कोई सूचना नहीं दी गई।
दूसरी ओर, यूएन सूचीबद्ध आतंकी मसूद अजहर ने पिछले साल 2 नवंबर को जैश सदस्यों के समागम में जिहाद का खुला आह्वान किया।
जैश-ए-मोहम्मद, लश्कर जैसे समूहों की देशभर ट्रेनिंग कैंप, वर्कशॉप और सभाएं भारत-विरोधी जहर उगल रही हैं। प्रतिभागियों का कट्टरकरण हो रहा है और मस्जिदें प्रचार स्थल बन गई हैं।
रिपोर्ट चेतावनी देती है कि पाकिस्तान का यह चयनात्मक रवैया क्षेत्रीय शांति के लिए खतरा है। असली आतंक को पनाह देने से वैश्विक विश्वास डगमगा रहा है।