मंगलवार को केरल हाईकोर्ट ने सबरीमला सोना चोरी कांड की जांच करने वाली एसआईटी को जमकर लताड़ा। आरोपपत्रों में विलंब से मुख्य संदिग्धों को वैधानिक जमानत मिल रही है, जिस पर जस्टिस ए. बदरुद्दीन की एकलपीठ ने गहरी नाराजगी जाहिर की। इससे जांच प्रक्रिया की विश्वसनीयता खतरे में पड़ रही है।
एसआईटी के दो चार्जशीट में 13 नामजद, लेकिन देरी का खामियाजा एक आरोपी को जमानत के रूप में भुगतना पड़ा। अदालत ने कहा कि समयसीमा लांघना व्यापक संदेह पैदा करता है और जनता का भरोसा डिगाता है। एसआईटी से समयबद्ध कदम न उठाने पर सवाल उठाए।
दोनों चोरी मामलों (द्वारपालका व कट्टिलप्पाला) के आरोपी मुरारी बाबू को जमानत मिल चुकी। उन्नीकृष्णन पोट्टी एक केस में बाहर हैं, दूसरे में फरवरी शुरूआत में राहत की उम्मीद। कोर्ट ने इसे जांच पर काला धब्बा बताया।
पंकज भंडारी (स्मार्ट क्रिएशंस) की बेल अर्जी पर बहस हुई, जहां उन्होंने छह बयानों से सहयोग साबित किया। कोर्ट ने अरेस्ट को टालने से इंकार किया, किंतु कानूनी सुरक्षा के हक की पुष्टि की।
जवाब में एसआईटी ने प्रक्रियागत बाधाओं, जब्त दस्तावेजों व लंबित फोरेंसिक रिपोर्ट का हवाला दिया। जमानत मिलने के बावजूद सजा सुनिश्चित करने का संकल्प दोहराया।
विधानसभा में हंगामा मच गया- सीएम विजयन व सतीशन आमने-सामने। विपक्षी विधायकों का धरना, सरकार पर हेरफेर का इल्जाम। यह घटनाक्रम त्वरित न्याय की मांग को बल देता है, मंदिर भक्तों की आस्था दांव पर।