नई दिल्ली। भारत-यूरोपीय संघ एफटीए को उद्योग संगठनों ने निर्यात के लिए क्रांतिकारी बताया है। 75 अरब डॉलर के अवसरों में श्रम प्रधान क्षेत्रों को 33 अरब डॉलर की विशेष सुविधा मिलेगी, जो कपड़ा, चमड़े, मछली और ज्वेलरी क्षेत्रों को फायदा पहुंचाएगी।
सीआईआई के चंद्रजीत बनर्जी ने इसे वैश्विक व्यापार में रणनीतिक जीत करार दिया। वैश्विक जीडीपी के 25 प्रतिशत वाली ये दो अर्थव्यवस्थाएं अब और मजबूत होंगी। ईयू बाजारों में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी तथा निवेश-प्रौद्योगिकी का प्रवाह तेज होगा।
एसएमई और रोजगार आधारित क्षेत्रों को लाभ के साथ प्रतिभा गतिशीलता सुनिश्चित होगी, जो समावेशी विकास की बुनियाद रखेगा और 2047 के लक्ष्य से जुड़ेगा। फिक्की के अनंत गोयनका ने ईयू को सबसे बड़ा बाजार बताया, जो विनिर्माण व उच्च मूल्य क्षेत्रों में वृद्धि लाएगा।
पीएचडीसीसीआई के डॉ. रणजीत मेहता के अनुसार, पांच सालों में ईयू निर्यात 35-45 प्रतिशत बढ़ सकता है। दवा क्षेत्र में 8-12 प्रतिशत, इंजीनियरिंग गुड्स में 7-10 प्रतिशत सालाना ग्रोथ की उम्मीद।
शुल्क ह्रास, निवेश संरक्षण व जीआई मान्यता से भारत मात्रा नहीं, गुणवत्ता का केंद्र बनेगा। यह एफटीए भारत की वैश्विक व्यापार यात्रा को नई दिशा देगा।