यूजीसी द्वारा जारी ‘उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता के नियम 2026’ को लेकर हंगामा मचा है। प्रख्यात भोजपुरी कलाकार नेहा सिंह राठौड़ ने इनकी तारीफ की और आलोचकों को उदार दृष्टिकोण अपनाने का मंत्र दिया।
बातचीत में नेहा ने नियमों के पीछे की मंशा स्पष्ट की- समाज में समता का प्रसार। भेदभाव और अपमान रोकना गलत कैसे? सवर्ण वर्ग से होने पर भी बोलीं- मेरे मन में कोई अपराधबोध नहीं, कानून निर्दोषों से नहीं डरते।
आरक्षण और एससी-एसटी कानून के शुरूआती विरोध का उदाहरण देकर कहा कि ये लाखों को मुख्यधारा में लाए। परिवर्तन काल में असंतोष स्वाभाविक है। जाति से ऊपर उठकर विचार करें। विरोध-अस्तीफा आपका हक है।
नेहा ने दोहरी नीति पर प्रहार किया- समानता की बात लेकिन उर्दू प्रचार या गोबर-गोमूत्र जैसी प्रथाओं पर मौन। राजनीति से परे ये नियम राष्ट्र के लिए शुभ हैं।
शंकराचार्य मामले में कहा- संत महान होते हैं, भूल सुधार लें। बड़ा दिल रखें। विपक्षी साजिश या एआई वीडियो से भटकें नहीं, असल बहस पर उतरें। नेहा के विचार शिक्षा क्षेत्र में समावेशी बदलाव की वकालत कर रहे हैं।