पाकिस्तानी हवालातों से रिहा होकर स्पिन बोलदक लौटे अफगानों ने जेलखानों में हुए जुल्मों का काला सच उजागर किया है। 500 से अधिक लोगों का यह कारवां कंधार पहुंचा, जहां इनकी जुबानी सुनकर सब सन्न रह गए। टोलो न्यूज ने इन घटनाओं को प्रमुखता से दिखाया।
पाकिस्तान का अफगानों परstaunchness बढ़ा है—गिरफ्तारियां बेतुका, हिरासत कठोर, निर्वासन जबरन। चमन-स्पिन बोलदक सीमा, व्यापारिक धमनी रही, अब सीमित आवागमन वाली। पिछले साल की हिंसा ने इसे ठप कर दिया।
अख्तर मोहम्मद ने चमन कैदखाने का हाल बताया—खाली पेट, बिना पानी, 100 लोग एक कोठरी में। अब्दुल सत्तार बोले, दस्तावेज थे फिर भी जेल, रिश्वतखोरों ने बिना कागज वाले को 45,000 रु. में मुक्त किया। ‘पैसे वाले छूटें, बाकी भगाए जाएं।’
मोहम्मद की कहानी दिल दहला दे—कराची जाते पकड़े गए, अफगान कहते ही लाठियां बरसीं। कंधे का दर्द बाकी है। औरतों को तौहीन, रातें जागरण की, रोटी का टुकड़ा भी आधा—दोस्त मोहम्मद ने वीडियो वाली बर्बरता का जिक्र किया।
विशेषज्ञों का कहना है, यह अंतरराष्ट्रीय नियमों का खुला उल्लंघन। ह्यूमनिटेरियन एजेंसियों को सक्रिय होना चाहिए। पाकिस्तान-ईरान की नीतियां अफगान शरणार्थियों के लिए अभिशाप। वैश्विक दबाव जरूरी, ताकि न्याय मिले।