आगामी 12 फरवरी के चुनावों में महिला उम्मीदवारों की संख्या घटकर 4.2% रह गई है, जिससे बांग्लादेश के अधिकार समूहों में भारी आक्रोश है। ढाका प्रेस क्लब में आयोजित एक बैठक में सामाजिक प्रतिरोध समिति ने चेतावनी दी कि चुनावी हिंसा और सांप्रदायिक तनाव महिलाओं की भागीदारी को और कम कर रहे हैं। फौजिया मोसलेम ने नामांकन के आंकड़ों को ‘अस्वीकार्य’ करार देते हुए निर्वाचन आयोग से लैंगिक रूप से संवेदनशील माहौल बनाने का आग्रह किया। एक्शनएड की मोरियम नेसा ने एक ज्ञापन के माध्यम से याद दिलाया कि महिलाओं ने देश के लोकतांत्रिक संघर्षों में हमेशा बड़ी भूमिका निभाई है, लेकिन आज उन्हें केवल ‘वोट बैंक’ की तरह देखा जा रहा है। कार्यकर्ताओं का मानना है कि जब तक राजनीतिक दल महिलाओं को उचित टिकट नहीं देते, तब तक सच्चा लोकतंत्र स्थापित नहीं हो सकता।
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