यूरोपीय परिषद अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा ने नई दिल्ली से संदेश दिया कि भारत और ईयू को संयुक्त राष्ट्र चार्टर के मूल सिद्धांतों पर आधारित वैश्विक कानून की रक्षा की साझा ड्यूटी निभानी चाहिए। पीएम मोदी और उर्सुला वॉन डेर लेयेन के साथ शिखर बैठक के बाद कोस्टा ने सहयोग के नए द्वार खुलने की बात कही।
लोकतंत्र और बहुपक्षवाद के चैंपियन के तौर पर दोनों की भूमिका अहम है। सुबह गांधीजी को श्रद्धा के बाद उनके शब्द गूंजे- विषमता में भी न्याय का मार्ग शांति लाता है, न कि युद्ध।
गोवा से जुड़ी अपनी विरासत पर गर्व जताते कोस्टा ने कहा कि उनके लिए यह साझेदारी पारिवारिक है। यूक्रेन शांति प्रयासों में पूर्ण समर्थन दोहराया गया, जिसमें क्षेत्रीय अखंडता सुनिश्चित हो। मोदी की कूटनीतिक भूमिका पर भरोसा व्यक्त किया।
गणतंत्र दिवस सम्मान के लिए धन्यवाद देते हुए भारत की विविधता की तारीफ की। व्यापार, सुरक्षा और संपर्कों में नया अध्याय शुरू। समृद्धि सुरक्षा पर टिकी है, इसलिए इंडो-पैसिफिक चुनौतियों का एकजुट मुकाबला।
रणनीतिक भरोसे का नया स्तर बनेगा। अनूठा रक्षा ढांचा आगे के सहयोग का आधार बनेगा, जो वैश्विक स्थिरता को मजबूत करेगा। भारत-ईयू बंधन अभूतपूर्व रूप लेगा।