गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का राष्ट्रिय संबोधन चर्चा का केंद्र बना, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे सोशल मीडिया पर सराहा। एक्स पर पोस्ट में उन्होंने भाषण को प्रेरणास्रोत बताया जो संविधान के आदर्शों को पुनःस्थापित करने और विकसित भारत गढ़ने की प्रेरणा देता है।
पीएम ने कहा, ‘राष्ट्रपति ने संविधान की खूबियों पर सही प्रहार किया और देश को आगे ले जाने वाली एकजुट भावना की ताकत की तारीफ की।’ यह हर नागरिक के लिए लोकतंत्र मजबूत करने का संदेश है।
राष्ट्रपति के संबोधन में भारत की प्रजातांत्रिक प्रगति, संवैधानिक नींव और आर्थिक उछाल पर चर्चा हुई। दुनिया की सर्वाधिक तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था के रूप में भारत की पहचान को युवा शक्ति से जोड़ा। किसान, महिला शक्ति, सेना और समाज के हर तबके का योगदान याद किया।
विशेष रूप से महिलाओं की उपलब्धियों को रेखांकित करते हुए खेतों से स्टेडियम और बॉर्डर तक उनकी मौजूदगी का वर्णन किया। क्रिकेट विश्व कप में बेटियों के विश्व रिकॉर्ड तोड़ने का उदाहरण दिया। ‘वंदे मातरम’ की गाथा सुनाकर एकता और गौरव की भावना जगाई।
भविष्य की ओर नजर डालते हुए भारत को तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य रखा। अतीत से सबक लेते हुए वर्तमान उपलब्धियों पर गर्व और भविष्य की मजबूत भारत की रूपरेखा खींची। पीएम मोदी की प्रतिक्रिया ने इस संदेश को राष्ट्रीय स्तर पर गूंजाया, गणतंत्र दिवस को यादगार बनाने को तैयार।