बिहार से तीन हस्तियों को मिले पद्मश्री सम्मानों में गोपालजी त्रिवेदी का योगदान विज्ञान क्षेत्र में अनुकरणीय है। गांव की मिट्टी से जुड़े इस वैज्ञानिक ने किसानों के जीवन को बदलने के लिए जीवन समर्पित कर दिया। मुजफ्फरपुर के मतलुपुर में जन्मे गोपालजी की कहानी संघर्ष और सफलता की मिसाल है।
बचपन से खेतीबाड़ी के दुख-दर्द देखे, जिससे विज्ञान में रुचि जगी। स्थानीय स्कूलों से प्रारंभिक शिक्षा, पूसा से मैट्रिक और लंगट सिंह कॉलेज से इंटर किया। आर्थिक तंगी ने कॉलेज बीच में छुड़वा दिया, लेकिन पूसा स्कूल में नौकरी ने रास्ता दिखाया।
कृषि विश्वविद्यालय से उच्च डिग्रियां हासिल कीं। तिरहुत कॉलेज में प्राध्यापक और पूसा विश्वविद्यालय के कुलपति बने। मछली पालन व कृषि में नई तकनीकों का विकास किया, जिससे किसानों को भारी लाभ हुआ। प्रयोगों को खेतों में उतारने का उनका तरीका अनोखा रहा।
सेवानिवृत्ति के बाद भी किसानों के साथ सक्रिय। पद्मश्री उनके अतुलनीय कार्यों का सम्मान है, जो बिहार के ग्रामीण युवाओं को प्रोत्साहित करेगा।